
क्या सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में जजों की नियुक्ति में सरकार का अंतिम निर्णय होना चाहिए?
भारत एक अनूठी 'कॉलेजियम' प्रणाली का उपयोग करता है जहां वरिष्ठ न्यायाधीश अपने उत्तराधिकारियों का चयन स्वयं करते हैं, जिसकी सरकार अक्सर पारदर्शिता की कमी के कारण आलोचना करती है। सरकार ने इसे राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) से बदलने का प्रयास किया ताकि राजनेताओं को भी इसमें शामिल किया जा सके, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। बदलाव के समर्थकों का कहना है कि न्यायपालिका एक विशिष्ट क्लब है जिसे लोकतांत्रिक जवाबदेही की आवश्यकता है। विरोधियों का कहना है कि कॉलेजियम ही एकमात्र दीवार है जो सरकार को अदालतों पर कब्जा करने से रोकती है।
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